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तेजी से बढ़ रही पेंशन समीक्षा की मांग, नाबार्ड के कर्मचारियों ने की आज हड़ताल

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नाबार्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारी ने दो दशक से लंबित पेंशन समीक्षा की मांग को लेकर मंगलवार को एक दिन की हड़ताल की.

नई दिल्ली. नाबार्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारी ने दो दशक से लंबित पेंशन समीक्षा की मांग को लेकर मंगलवार को एक दिन की हड़ताल की. नाबार्ड के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने ‘यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑफिसर्स, एम्प्लॉइज एंड रिटायर ऑफ नाबार्ड’ (UFOERN) के बैनर तले हड़ताल की. बता दें कि कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए राष्ट्रीय बैंक (Nabard) एक शीर्ष कृषि वित्त संस्थान है, जिसकी स्थापना 1981 में संसद के एक अधिनियम के तहत हुई थी.

2001 से लंबित है पेंशन की समीक्षा

इन कर्मचारियों के पेंशन की समीक्षा 2001 से लंबित है. आरबीआई के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए 2012 में पेंशन को संशोधित किया गया था, लेकिन वित्त मंत्रालय को नाबार्ड के मुद्दे पर अभी निर्णय करना है. संस्थान के पिछले अध्यक्षों और प्रबंध निदेशकों ने एक महीने पहले पत्र लिखा था, लेकिन मामले पर कोई प्रगति नहीं हुई.

कर्मचारी कर रहे ये हैं मांगे

फोरम ने एक बयान में कहा कि उनकी मांगों में 20 साल की सेवा के बाद पूर्ण पेंशन, अंतिम वेतन या पिछले 10 वर्षों में मिले औसतन वेतन, में जो अधिक हो, उसके आधार पर वेतन की गणना और प्रत्येक वेतन समीक्षा के साथ पेंशन में बढ़ोतरी शामिल हैं.

दिया गया था आश्वासन

नाबार्ड अधिनियम, 1981 की धारा 50 में इस संबंध में लिखित आश्वासन की गारंटी दी गई थी. मगर अभी तक ऐसा नहीं हो सका. ऐसे में मजबूर होकर सभी कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि संघ की चार मांगे हैं.

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